सुखी एवं समृद्ध राष्ट्र, समाज और परिवार के लिए समाज के सम्पूर्ण अंगो का समग्र चिन्तन आवश्यक होता है। चिन्तन से प्राप्त परिणामों को क्रियान्वित करने के लिए स्वप्रेरणा से तन-मन-धन समर्पण करने के साथ-साथ समान वैचारिक आधार एवं क्षमता वाले युवकों का संकलन आवश्यक है। किसी भी राष्ट्र एवं समाज की सच्ची समृद्धि एवं सम्पति वीर, कर्मठ, चरित्रवान, उदार एवं जाबांज युवा होते है। ऐसे युवा राष्ट्र एवं समाज को प्रगति एवं विकास के पथ पर आरूढ़ करते है।
खण्डेलवाल समाज की प्रगति एवं उत्थान के लिए युवाओं में समाज के प्रति श्रद्धा एवं लगाव बढने पर ही समाज की तीव्र गति से उत्थान सम्भव था। इसलिए सामाजिक कार्यों में लम्बे समय से कार्यरत श्री नरेश सौखिया, श्री चन्द्रमनोहर जी बटवाड़ा, श्री दिनेश पीतलिया एवं श्री रामावतार बडाया ने वर्ष 1994 में अखिल भारतीय खण्डेलवाल वैश्य संघ का गठन किया।
1. समान विचार वाले सक्रिय युवाओं का संकलन करना।
2. युवाओं को स्वप्रेरणा से समाज सेवा एवं समाज के कार्यो में सक्रियता के लिए प्रेरित करना।
3. समाज उत्थान के उपयोगी एवं रचनात्मक कार्यक्रमों का आयोजन एवं अन्य संस्थाओं का इस प्रकार के कार्यक्रमों में सहयोग करना।
4. सामाजिक संस्थाओं की प्रबंध समितियों में प्रतिनिधि पहुँचा कर उनका उत्थान करना।
5. समाज में चल रहे विभिन्न प्रकल्पों एवं कार्यक्रमों की कमियों को अपने सहयोग से दूर करना व उसे पुनः सुदृढ करना एवं पुनः उसी सामाजिक संस्था को ही संभलाना।
मुझे पूर्ण विश्वास है कि सभी सक्रिय सदस्यों के सहयोग से यह संगठन निरन्तर अपने लक्ष्य के प्रति बढ़ता हुआ समाज के चहुंमुखी विकास एवं सम्पूर्ण समाज को एक संगठित रूप में खड़ा करने में सक्षम होगा।
मेरा सभी साथियों से निवेदन है कि संस्था की सकारात्मक सोच के साथ समाज-देशहित लोकेशणा के साथ हमें नवीन प्रयोगों को करना होगा। जिससे समाज हित के लिए हाथ से हाथ जुड़ते चले जावें एवं एक ताकत सज्जन शक्ति के रूप में दिखें, जो समाज व देश को नई उर्जा सके।
जय युवा शक्ति-जय राष्ट्र शक्ति
नरेन्द्र मामोड़िया महामंत्री
1. संगठन के उददेश्य के अनुसार युवकों को पर, कर नये सदस्य बनाना। पिछले कार्यकाल में सक्रिय रहे सदस्यों को ही अगले कार्यकाल में सदस्य बनाना।
2. एक कार्यकाल सामान्यत: दो वर्ष का।
3. सदस्यता शुल्क सामाजिक परिवेश को ध्यान में रखकर तय करना जो कि समयानुसार परिवर्तनीय रहेगा।
4. संरक्षक मण्डल द्वारा पदाधिकारियों का मनोनयन।
5. सभी सदस्यों में आत्मीयता व घनिष्ठता बढ़ाने हेतु सामान्यतः परिवार सहित वर्ष में चार कार्यक्रमों का आयोजन यथा सावन की गोठ, दीपावली स्नेह मिलन, पोष बड़ा एवं होली स्नेह मिलन- फागोत्सव।
6. संगठन में कार्यक्रमों के अनुसार ही धन एकत्रित किया जाता है। धन जमा रखने की कोई योजना नही होती है।
7. संगठन को सुदृढ़ व्यवस्था की दृष्टि से जयपुर शहर को 5 जोन एवं 18 क्षेत्रों में विभाजित किया हुआ है।
8. नेतृत्व क्षमता के विकास हेतु सभी पदाधिकारियों द्वारा अपने कार्यकाल में अपने जैसा एक कार्यकर्ता आवश्यक रूप से तैयार करना।
1. वर्ष 1997 में सामूहिक विवाह सम्मेलन का अभूतपूर्व आयोजन जिसमें 200 जोड़ो का विवाह एवं संग्रहित राशि में से बची हुई राशि 2.5 लाख रूपये मा. मुख्यमंत्री जी के कर कमलों से आगामी सम्मेलन के संयोजक श्री शिवशंकर गुप्ता को दी गई।
2. नेत्र चिकित्सा शिविर का आयोजन।
3. ड्राईविंग लाईसेन्स शिविर का आयोजन।
4. वर्ष 2005 में पुनः सामूहिक विवाह सम्मेलन का आयोजन एवं बची हुई राशि 29 प्रतिशत के हिसाब से सहयोगकर्ताओं को वापस।
5. वर्ष 1994 से आयोजित सामूहिक विवाह सम्मेलनों में पूर्ण सहयोग।
6. गोविन्द नगर क्षेत्र द्वारा 9 वर्षों तक लगातार रक्तदान शिविर का आयोजन।
7. रामगंज क्षेत्र द्वारा 7 वर्षों तक भारतीय नववर्ष के दिन रक्तदान एवं चिकित्सा शिविर का आयोजन।
8. शास्त्री नगर व वैशाली नगर क्षेत्र द्वारा रक्तदान शिविर एवं चिकित्सा शिविर का आयोजन।
9. मुरलीपुरा क्षेत्र द्वारा गत 7 वर्षों से नवरात्रों में डांडिया महोत्सव का आयोजन।
10. दक्षिण जोन द्वारा नवरात्रों में डांडियाँ महोत्सव का सफलतम आयोजन।
11. विभिन्न खेलों मे माध्यम से समाज की प्रतिभाओं को आगे लाने हेतु प्रतिभा खोज कार्यक्रम का आयोजन।
12. गंगा मन्दिर समिति द्वारा आयोजित अन्नकुट महोत्सव में वितरण व्यवस्था में सहयोग जिससे प्रसादी हेतु आने वाले बंधुओं की संख्या में बढ़ोतरी।
13. विगत 5 वर्षो से बंसत पंचमी के अवसर पर जयपुर शहर में विभिन्न स्थानों पर रक्तदान एवं चिकित्सा शिविर का सफलतम आयोजन।
14. गौ माता एवं हमारा स्वास्थ्य विषय पर गौविज्ञानी श्री निरंजन जी वर्मा द्वारा व्याख्यान
15. कक्षा 9 से 11 के बच्चों के लिए कैरियर कॉउंसलिंग का अभूतपूर्व कार्यक्रम ।
1. युवाओं के व्यक्तित्व विकास हेतु कार्यशालाओं का आयोजन।
2. स्कूल विद्यार्थियों हेतु कैरियर गाईडेन्स शिविर का आयोजन।
3. क्रिकेट एवं अन्य प्रतियोगिताओं के माध्यम से प्रतिभा खोज कार्यक्रमों का आयोजन।
4. युवा प्रतिभाओं के सम्मान एवं प्रोत्साहन हेतु युवा महोत्सव का आयोजन।
5. विभिन्न स्तरों पर रक्तदान शिविर का आयोजन।
6. गौ विज्ञान एवं स्वास्थ्य के सम्बन्ध में जनजागरण के कार्यक्रमों का आयोजन
7. समाज की कुल देवियों के प्रति श्रद्धाभाव जागृत करने के कार्यक्रम का आयोजन।
1. अपने से बड़ो का दिल से सम्मान करें, आपको बहुत सी महत्वपूर्ण , बातें बहुत कम समय में सीखने को मिल जायेगी जो आपकी तरक्की का मार्ग प्रशस्त करेगी।
2. आप क्या बोलते है यह बात बाद में देखी जाती है लेकिन आप कैसे बोलते है इसका प्रभाव पहले पड़ता है। अपनी बातों को हमेशा विनम्रता पूर्वक ही पेश करें।
3. जितना अधिक आप अपनी संस्था के इन्फ्रास्ट्रक्चर के बारे में जानकारी रखेंगे। आपके भीतर उतना ही अधिक आत्मविश्वास पैदा होगा जो आपको सफलता दिलवाने में मदद करता है।
4. समयबद्वता साथियों के दिल में आपके प्रति सम्मान पैदा करती है जिससे आपको सकारात्मक परिणाम मिलने की सम्भावना बन जाती है।
5. साथियों के साथ अनावश्यक बहस करने से बचें ! आपके लिए महत्वपूर्ण आपका लक्ष्य होना चाहिए न कि बहस जीतना।
6. प्रत्येक साथी सम्माननीय होता है फिर चाहे वह उम्र में छोटा हो अथवा बड़ा इससे कोई फर्क नही पड़ता। बात करते वक्त हमेशा सम्मान सूचक शब्दों का प्रयोग अवश्य करते रहें।
7. विदा होते समय साथियों का विनम्रतापूर्वक आभार व्यक्त करना ना भूले।
1. Compilation of active yadavas with same views
2. Motivate the youth with self - motivation to be active in the activities of social service and social upliftment.
3. Organising useful and constructive programmes of social upliftment and supporting other institutions in these programmes.
4. Representative in the promotion committees of social institutions and uplift them.
5. To remove and reaffirm the deficiencies of various programmes and programmes in the society from our co - operation and reactivate the same social institution.
1. Conduct workshops on personality development of yuboas.
2. Organizing a career guidance camp for school students.
3. Talent search programmes are organised through cricket and other competitions.
4. Organizing young festoon for honours and encouragement to young talent.
5. Organising a blood donation camp at various levels.
6. Organizing programmes for awareness of masses in relation to science and health
7. Organising programmes to awaken reverence for the total goddesses of society.